Monday, June 24, 2024
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Makar Sankranti 2024 :- मकर संक्रांति कब 14 या 15 जनवरी। जानें महत्व ,शुभ मुहूर्त और क्यों मनाई जाती है,मकर संक्रांति ?

Makar Sankranti 2024:- हर साल की तरह इस साल भी लोगों में  मकर संक्रांति को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि मकर संक्रांति 14 या 15 जनवरी किस दिन मनाई जाएगी.आइये जानते हैं मकर संक्रांति किस दिन मनाई जाएगी, इस दिन का शुभ मुहूर्त,पूजा विधि,और क्या करे और क्या नहीं करें  ……

कब है Makar sankranti 2024 Date :-

 साल 2024 में ज्योतिषविदों एवं पंचांग के अनुसार 15 जनवरी , सोमवार को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा।इस दिन सूर्य देव प्रातः 02 बजकर 54 मिनट पर धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे ।

भारत में शानदार ढंग से मनाए जाने वाले त्योहारों में से, मकर संक्रांति एक भारतीय त्योहार है। जब सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब मकर संक्रांति मनाई जाती है।सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना मकर संक्रांति कहलाता है। वास्तव में मकर शब्द का अर्थ मकर होता है और संक्रांति का शाब्दिक अर्थ है सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश।

लोग सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश का जश्न मनाते हैं, सूर्य देव को सम्मान देते हैं 

Makar sankranti 2024 का शुभ मुहूर्त ,समय और तारीख 

 पुण्य काल मुहूर्त: 15 जनवरी, सुबह 07:15 बजे – शाम 05:46

बजे (अवधि: 10 घंटे 31 मिनट)

महा पुण्य काल मुहूर्त: 15 जनवरी, सुबह 07:15  बजे – सुबह 09:00  बजे (अवधि: 1 घंटा 45  मिनट)

मकर संक्रांति का समय : 15  जनवरी, प्रातः 02:54 बजे 

Makar sankranti 2024 की पूजा- विधि :-

  • पूजा करने के लिए सबसे पहले सुबह जल्दी  उठकर साफ सफाई कर लें। 
  • फिर अगर संभव हो तो आसपास किसी पवित्र नदी में स्नान करें यदि ऐसा न कर पाएं तो घर में ही गंगाजल मिलकर स्नान कर लें। 
  • इसके बाद चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर सूर्य देव की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करें।
  • सूर्य देव को हल्दी और चंदन का तिलक लगाए और अक्षत(चावल) चढ़ाएं. 
  • सूर्यदेव को लाल फूल अर्पित करें और धूप-दीप जलाये। 
  • इस दिन पीले वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है, तो पीले वस्त्र धारण कर सूर्य देव को अर्घ्य दें। 
  • इसके बाद सूर्य चालीसा पढ़े और आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करें।  
  • अंत में आरती करें और दान करें। 

Makar sankranti का महत्व :-

 हिंदू धर्म में  मकर संक्रांति के पर्व का विशेष महत्व है। यह त्यौहार नई फसल और नई ऋतु के आगमन का भी संकेत है। मान्यता है की इस दिन देव भी धरती पर अवतरित होते है ,आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। धरती पर  अंधकार का नाश व प्रकाश का आगमन होता है। इस दिन दान-पुण्य,जप और धार्मिक अनुष्ठानों का अनन्य महत्व है। इस दिन गंगा स्नान व् सूर्य उपासना के बाद गुड़,चावल और तिल का दान श्रेष्ठ माना गया है।     

मकर संक्रांति कब मनाई जाती है? मकर संक्रांति के पीछे खगोल विज्ञान :-

मकर संक्रांति हिंदू कैलेंडर (चंद्र) माघ महीने में मनाई जाती है। हालांकि, अन्य हिंदू त्योहारों की तारीखें जो हर साल बदलती रहती हैं, के विपरीत, मकर संक्रांति हर साल 14 या 15 जनवरी को पड़ती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह त्योहार सौर कैलेंडर पर आधारित है, न कि चन्द्र-सौर कैलेंडर (हिंदू कैलेंडर) पर। चूंकि संक्रांति एक सौर घटना है, इसलिए यह त्योहार आम तौर पर हर साल 14 जनवरी को एक ही दिन मनाया जाता है। हालांकि, कभी-कभी भारत में 14 तारीख को सूर्यास्त के बाद सूर्य मकर राशि (राशि/नक्षत्र) में प्रवेश करता है, और इसलिए उन वर्षों में 15 जनवरी को सूर्य के मकर राशि (मकर) में प्रवेश को चिह्नित करने के लिए यह त्योहार मनाया जाता है। . यह उत्तरायण के पवित्र चरण की शुरुआत का भी प्रतीक है जिसे ‘मुक्ति’ प्राप्त करने का सबसे अच्छा समय माना जाता है।

महाभारत महाकाव्य की एक किंवदंती हमें भीष्म द्वारा अपनी अंतिम सांस लेने के लिए उत्तरायण की प्रतीक्षा करने की कहानी बताती है। महाभारत के युद्ध में भीष्म गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उनके पूरे शरीर पर तीरों ने वार कर दिया था। आत्महत्या करने से पहले, उन्हें बाणों की इस शय्या पर 51 रातों तक प्रतीक्षा की। उन्होंने अंतिम सांस लेने से पहले उत्तरायण के शुभ दिन आने का इंतजार किया ताकि वह पुनर्जन्म के इस चक्र से मुक्ति प्राप्त कर सकें।

पुण्य काल का क्या अर्थ है?

संस्कृत में, “पुण्य” का अर्थ है पवित्र, सदाचार, और “काल” का अर्थ है समय, कुल मिलाकर, “पुण्यकाल” का अर्थ है “पवित्र-समय”। जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में थोड़े समय के लिए संक्रमण करता है, तो वह दोनों राशियों में दिखाई देता है। इस अवधि को पुण्य काल कहा जाता है, एक ऐसा समय जिसमें बहुत शुभ माना जाता है क्योंकि हर कोई दोनों राशियों का लाभ प्राप्त कर सकता है, और स्नान, सूर्य पूजा, दान (दान और पुण्य ) आदि गतिविधियां पुण्य काल के  दौरान की जानी चाहिए, इसलिए आमतौर पर संक्रांति के दिन सूर्योदय से सूर्यास्त  तक पुण्य के कार्य  किये जाता है।

मकर संक्रांति के दिन भूलकर न करें ये काम:-

1. मकर संक्रांति वाले दिन भूल से भी रात्रि का बचा हुआ या बासी खाना नहीं खाएं,इससे आपके अंदर अधिक गुस्सा और और नकारात्मक ऊर्जा हावी होती है,इस  दिन खिचड़ी खाने की परंपरा है. इस दिन खिचड़ी और तिल का सेवन करना चाहिए।

2. मकर संक्रांति वाले  दिन तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए यानी की  प्याज ,लहसुन और मांस से दूर रहना है

4. मकर संक्रांति के दिन भूल से भी नशा नहीं करें. शराब, सिगरेट, गुटखा आदि नशीले पदार्थों  का सेवन नहीं करना चाहिए.

5. मकर संक्रांति प्रकृति के जश्न मनाने का पर्व है.इस दिन पेड़-पौधों को भी नहीं काटना चाहिए.

6. मकर संक्रांति के दिन अपनी वाणी पर कंट्रोल रखना चाहिए. किसी पर भी गुस्सा नहीं करना चाहिए किसी के लिए अपशब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

7. मकर संक्रांति वाले दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं ग्रहण करना चाहिए,मकर संक्रांति के दिन स्नान-दान का विशेष महत्व है। 

मकर संक्रांति के दिन क्या करना चाहिए :-

1. मकर संक्रांति के दिन सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पूजा-पाठ करनी चाहिए . इसके साथ ही सूर्यदेव को अर्घ्य देना चाहिए

  1. मकर संक्रांति के दिन दान- पुण्य करना काफी शुभ माना जाता है इस दिन तिल-गुड़ और खिचड़ी का दान करना अच्छा होता है. 
  1.  मकर संक्रांति वाले  दिन पितरों का तर्पण करना शुभ माना जाता है. इस दिन तर्पण करने से घर में पितृ दोष दूर होता है,साथ ही पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती  है।  
  1.  मकर संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिल जाती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। सबसे उत्तम गंगा स्नान होता है. इस दिन गंगाजल से स्नान करें और घर में भी गंगाजल का  छिड़काव करें
  1. मकर संक्रांति वाले दिन शनिदेव के मंदिर में तेल चढ़ाना बहुत ही शुभ माना जाता है। इससे शनिदेव की कृपा दृष्टि बनी रहती हैं और आपके जीवन में सुख-समृद्धि का वास रहता है.
  1.  मकर संक्रांति के दिन गायों को हरा चारा खिलाने का विशेष महत्व है.ऐसा करने से घर में हमेशा खुशहाली रहती है। 

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