Saturday, June 15, 2024
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आखिर क्यों नहीं पहनते मरे हुए व्यक्ति के वस्त्र ? || Why don’t you wear the clothes of a dead person?

हमारे हिन्दू में धर्म में हम अक्सर ये सुनते आये है की कभी भी मृत व्यक्ति के वस्त्रों या अन्य किसी चीज़ को धारण नहीं करना चाहिए लेकिन इसके पीछे कारण बहुत ही कम लोग जानते है आखिरकार सदियों से हिन्दू धर्म में ये परम्परमा क्यों चली आ रही है आज हम इसके पीछे जुड़े कारण को जानेंगे।

1. पुनर्जन्म का विधान (Law of Reincarnation):

  • हमारे हिन्दू के अंदर पुनर्जन्म का विधान चलता आया है, यानी कि जिस व्यक्ति की मृत्यु होगी उसकी आत्मा दुबारा एक नए शरीर में जन्म लेगी। लेकिन उसके लिए हमारे धर्म में कुछ शर्ते है अगर वो शर्ते पूरी होती है तब ही मृत व्यक्ति नए शरीर में प्रवेश कर सकता है। जिसके लिए सबसे पहले मृत व्यक्ति का शरीर पूरी तरह मुक्त होना जरूरी है। 


2. सद्गुरु जग्गी वासुदेव के अनुसार(According to Sadhguru Jaggi Vasudev): 

  • इनका कहना है की मृत्यु बहुत ही धीमी प्रक्रिया है जिस प्रकार जन्म भी आसानी से नहीं होता शिशु को जन्म लेने से पहले गर्भावस्था में लम्बा इंतज़ार करना पड़ता है। मृत्यु की प्रक्रिया भी ऐसी ही है। जब व्यक्ति जन्म से मौत के बीच का सफर तय कर रहा होता है वह हमेशा मौत से भागने या उसे हराने की कोशिश में लगा रहता है। लेकिन जब वह जीवन की इस भाग दौड़ से हर जाता है तो उसकी आत्मा उसके शरीर को छोड़ देती है। 
  • जब एक आत्मा शरीर से निकल जाए उसके बाद उसके परिवार वालो उसके सारे वस्त्र या  प्रिय चीज़ो को उसके साथ जला या फिर दान में दे देना चाहिए। 
  • उसके किसी भी वस्त्र या प्रिय वस्तु का उपयोग नहीं करना चाहिए। क्योंकि ये चीज़े आत्मा को व्ही रोके रखती है उसे मुक्त नहीं होने देती है। 
  • अगर मरे हुए व्यक्ति के कपड़े कोई मनुष्य पहनता है तो आत्मा समझ नहीं पति की उसे धरती पर रहना चाहिए या वह मृत्युलोक छोड़कर तो जाना चाहती है परन्तु अगर उसके वस्त्र या प्रिय चीज़ आपके पास रहेगी तो वह अपना मोह आपसे नहीं निकाल पायेगी। और वह एक बंधन में बंध कर रह जाती है तथा उसे मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती। बड़े ऋषि मुनियो को जब अपनी मृत्यु को अंदेशा हो जाता था तो वह अपनी कुटिया के आग लगा दिया करते थे ताकि उनका कोई भी सामान कोई इस्तेमाल न करें वरना उन्हें मोक्ष की प्राप्ति नहीं होगी। 

3. जन्म तथा मृत्यु(birth and death) : 

  • सांसारिक नियमो के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म होता है उसका मरना तय है। तथा जिसकी मृत्यु हुई है उसे दुबारा जन्म भी लेना पड़ेगा। हमारी हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार मृत्यु होने के बाद भी उस व्यक्ति की आत्मा परिवार में रहती है।  परिवार में जो चल रहा है उसे देखती है, सुनती है। और आस पास का सभी वातावरण महसूस कर सकती है जब तक लाश को अग्नि को समर्पित न आकर दिया जाये था मृत व्यक्ति का अंतिम संस्कार न का दिया जाये जब तक आत्मा अपने शरीर को वापस पाने की कोशिश में लगी रहती है। अपने परिवार से और संसार के मोह के बंधन से मुक्त नहीं हो पाती है।  इसलिए मृत व्यक्ति का दाह संस्कार किया जाता है ताकि उसे मोक्ष की प्राप्ति हो सके।  


4. आत्मा का अपनी प्रिय वस्तु से लगाव(attachment of the soul to its beloved):

  • मृत व्यक्ति की आत्मा का अपने शरीर से तो लगाव होता ही है साथ ही अपनी किसी भी प्रिय वस्तु या कोई ऐसी वस्तु जो हमेशा उसके पास रहती हो जैसे की पेन घड़ी इत्यादि या कोई कीमती सामान ये सब चीज़े अगर परिवार के पास रहेगी तो वह उसका इस्तेमाल करेंगे। जो की फिर आत्मा की मुक्ति में बाधा बन जाता है।  इसलिए खा जाता है मरने के बाद मरे हुए व्यक्ति के कपड़े आदि को उसके साथ जला देना चाहिए तथा उसकी प्रिय वस्तु जो जलाने योग्य न हो को दान कर देना चाहिए।  शरीर त्यागने के बाद आत्मा एक ऊर्जा बनकर रहती है जो की अच्छी और बुरी दोनों प्रकार की हो सकती है।  इसलिए मृत व्यक्ति की किसी भी चीज़ को अपने पास न रखे। उसे किसी गरीब या निर्धन व्यक्ति को दान में दे दे। 

5. इस विषय को लेकर प्रैक्टिकल विचारधारा(Practical thoughts on this subject):   

  • इस विषय को लेकर और एक विचारधारा भी है जिससे आप प्रैक्टिकल विचारधारा भी कह सकते है। मृत व्यक्ति की अंतिम समय इम्युनिटी पावर धीरे धीरे खत्म होने लगता है। तथा ये भी सम्भव है की अगर व्यक्ति मौत किसी बीमारी से हुई हो तो उसके कपड़ो पर बैक्टीरिया या माइक्रो ऑरगैनिज्म रह जाते है जो नंगी आँखो से नहीं देखे जा सकते है। इसलिए कहा जाता है। की मृत व्यक्ति के कपड़ो का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। 
  • अब आती है मृत व्यक्ति की प्रिय वस्तुओं की बात, अक्सर हम मृत व्यक्ति किसी वस्तु को उसकी याद की तोर पर अपने पास रख लेते है लेकिन क्या आप जानते है ऐसा करना आपको मानसिक रूप से कमजोर बनाता है तथा बार बार मृत व्यक्ति याद दिलाता है जिससे आपको बार बार पीड़ा होगी तथा आपको अपनी लाइफ में आगे बढ़ने में दिक्क्त होगी इसलिए मृत व्यक्ति की सभी प्रिय वस्तुओं को अपने पास न रखकर दान कर देना चाहिए। 


6. मृत्यु में के बाद जीवन में आस्था(belief in life after death): 

  • अगर आप ये मानते है की मृत्यु के बाद पुनः जीवन होता है।  तथा मृत्यु किसी का अंत नहीं होता बल्कि आत्मा की नयी शुरुआत होती है। तो आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की मृत्यु के बाद कोई आत्मा के पुनः जन्म लेने में कोई बाधा न हो जिसके लिए आपको उसकी भी प्रिय वस्तु को अपने पास नहीं रखना चाहिए उन्हें या तो दान में या फिर जला देना चाहिए। 

दोस्तों आज की इस पोस्ट में हमने मृत्यु के बाद होने वाली घटना पर चर्चा की है। आपको यह पोस्ट कैसी लगी हमे कमेंट करके जरूर बताये और ऐसी बातें आप फ्यूचर में और पढ़ते रहना चाहते हो तो आप हमारी knovn.in को फॉलो कर सकते हो। 

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