Tuesday, June 25, 2024
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Holi 2023: भारत में हर साल होली क्यों मनाई जाती है? इसके पीछे का कारण आपको हैरान कर देगा || Why is Holi celebrated every year in India? The reason behind this will surprise you

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हर साल भारतवर्ष में फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है जो की सदियों से चला आ रहा है, लेकिन इसके पीछे छुपे रहस्मयी कारण को कभी किसी ने नहीं जाना आज हम आपको बताएंगे कि आखिर क्यों हर वर्ष होलिका दहन किया जाता है। 

होली त्यौहार हिंदुओं का सांस्कृतिक,धार्मिक और पारंपरिक त्यौहार है। हमारे सनातन धर्म में हर मास की पूर्णिमा को बड़ा महत्व दिया जाता है और हर बार यह किसी न किसी उत्सव के रूप में मनाई जाती है। इसी के एक क्रम में होलिका का त्यौहार भी आता है जो की वसंतोत्सव के रूप में फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस दिन सतयुग में विष्णु भक्ति का प्रतिफल के रूप में सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। 

1. होलिका दहन की भक्त प्रहलाद से जुड़ी कथा:

  • होली हिन्दू धर्म के अनुसार मुख्य रूप से भक्त प्रहलाद की याद में मनाई जाती है। भक्त प्रहलाद का जन्म राक्षस कुल में हुआ था। लेकिन वह भगवान नारायण के अद्वितीय भक्त थे। उनके पिता हिरण्यकश्यप को प्रहलाद की ईश्वर के प्रति श्रद्धा पसंद नहीं थी, इसलिए  हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रहलाद को अनेकों प्रकार के कठोर दंड दिए। प्रहलाद की बुआ होलिका को एक ऐसा वस्त्र वरदान में मिला हुआ था की उसको पहन कर आग में बैठने से उसे आग भी नहीं जला पायेगी। होलिका भक्त प्रहलाद को मारने के लिए वह वस्त्र पहनकर आग में बैठ जाती है। उसी वक्त भक्त प्रहलाद ने हरि जप करना शुरू कर दिया फिर हुआ ये की  विष्णु भक्ति के फलस्वरूप होलिका ही जल गई और भक्त प्रहलाद को एक खरोच तक न आई। बुराई पर अच्छाई  की जीत की ख़ुशी में हर वर्ष यह पर्व मनाया जाता है। अगले दिन रंगों का पर्व यह सन्देश देता है कि काम, क्रोध,मोह, मद एवं लोभ रुपी दोषों को छोड़कर भगवान की भक्ति में मन लगाना चाहिए। 
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2. राधा-कृष्ण के प्रेम से भी जुड़ी होली की कथा : 

फाल्गुन मास की पूर्णिमा का यह त्यौहार राधा-कृष्ण के पवित्र प्रेम से भी जुड़ा है। पौराणिक समय से चले आ रहे श्री कृष्ण और राधा की बरसाने की होली के साथ ही होली का उत्सव शुरू हुआ था। अभी भी हर वर्ष बरसाने और नंदगांव में लट्ठमार होली खेली जाती है जो की विश्व विख्यात है।

3. कामदेव से जुड़ी है होलिका की कहानी की : 

होली की कथा कामदेव से भी जुड़ी है आइये जानते है शिवपुराण के अनुसार, हिमालय की पुत्री पार्वती भगवान शिव से शादी करने हेतु घोर तपस्या कर रहीं थीं। वह पूरी तरह भगवान शिव भी तपस्या में लीन थी। इंद्र देव का भी शिव-पार्वती के इस विवाह में स्वार्थ छिपा था वो ये कि ताड़कासुर का वध शिव-पार्वती के पुत्र द्वारा होना था। जिस वजह से इंद्र व अन्य देवताओं ने कामदेव को शिवजी की तपस्या भंग करने भेजा दिया। शिव जी की समाधि को भंग करने के लिए कामदेव ने शिव पर सबसे पहले अपने ‘पुष्प’ बाण से प्रहार किया था। उस वाण से भगवान शिव के मन में प्रेम और काम का संचार होने के कारण उनकी समाधि भंग हो गई थी जीससे क्रुद्ध होकर भगवान शिव ने अपना तीसरा नेत्र खोल कामदेव को भस्म कर दिया थे। भगवान शिव की तपस्या भंग होने के बाद देवताओं ने शिवजी को पार्वती से विवाह के विनती की। कामदेव की पत्नी रति को अपने पति के पुनर्जीवन का वरदान तथा भगवान शिव व माता पार्वती से विवाह का प्रस्ताव स्वीकार करने की प्रसनत्ता में देवताओं ने मिलकर इस दिन को एक उत्सव की तरह मनाया था यह दिन फाल्गुन पूर्णिमा का दिन ही था। इसी ख़ुशी दिन को प्रसंग के आधार पर काम की भावना को प्रतीकात्मक रूप से जला कर सच्चे प्रेम के विजय  में इस उत्सव को मनाया जाता है।

दोस्तों आज की इस पोस्ट में हमने होली मनाने के पीछे जुड़ी रोचक कहानियों के बारे में जाना है। आपको हमारी ये पोस्ट कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताये और फ्यूचर में नई खबरों से अपडेट रहने के लिए आप हमारी वेबसाइट को फॉलो कर सकते है। 

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