Tuesday, June 25, 2024
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गणगौर पर्व की ऐतिहासिक कहानियां || Historical stories of Gangaur festival

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हर वर्ष भारत वर्ष होली के दूसरे दिन से 18 दिनों तक कुंवारी लड़किया व विवाहित महिलाएं गणगौर पूजन करती है। तथा अंतिम दिन गणगौर का विशाल मेला आयोजित किया जाता है जिसके बाद गणगौर को पानी में विसर्जित कर दिया जाता है। इस पर्व से बहुत सी कथाये जुडी है उनमें से कुछ हम आज के इस आर्टिकल में पढ़ेंगे। 

1.भगवान शिव व माता पार्वती की कथा {Story of Lord Shiva and Mother Parvati}:

  • एक बार की बात है जब शिवजी व पार्वती जंगल में घूमने गए थे। वे दोनों चलते-चलते घने जंगल में पहुंच जाते है। जब पार्वती शिवजी कहती है की मुझे बहुत जोरो से प्यास लगी है। इस पर शिवजी कहते है।  वह देखो बहुत से पक्षी बैठे है शायद वहां पर तुम्हें पानी मिल जाये। पार्वती जी वहां पर जाती है और देखती है वहाँ पर एक नदी बह रही है। पार्वती जैसे ही उस नदी में पानी पीने लगती है पहली बार में उनके हाथ में दुब का गुच्छा आ गया फिर पार्वती जी ने दूसरी बार पीना चाहा तो इस बार फूल हाथ में आ गए इसके बाद पार्वती जी एक और बार प्रयास करती है इस पार्वती जी के हाथो में एक फल आ गया। ये सब देखकर पार्वती जी के मन में कई सवाल आते है तथा वह इन सब के बारे में भगवान शिव से पूछती है तो शिवजी कहते है की आज के दिन चैत्र शुक्ल तीज है। तथा इस दिन विवाहित महिलाएं गणगौर पूजन करके गणगौर और पूजन की सामग्री को पानी में विसर्जित करती है। ये सब सुनकर पार्वती शिवजी से कहती है की आप 2 दिन के लिए एक नगर बनवा दे ताकि सभी महिलाएं वहीं आकर गणगौर पूजन करें तथा में उन्हें अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद दे सकू। अब भला पत्नी आगे किस पति की चलती है। शिवजी पार्वती की बात मन जाते है और जैसा वो कहती है वैसा ही करते है। थोड़ी देर में वहा महिलाएं पूजन के लिए आती है। जिस पर पार्वती जी एक बार चिंतित हो जाती है और भोलेनाथ से कहती है की में तो पहले ही अपनी और से उन्हें वरदान दे चुकी हु अब आप ही उन्हें अखंड सौभाग्य का वरदान दे। शिवजी वैसा ही करते है वह सभी स्त्रियों को अखंड सौभाग्य का वर देते है।  तथा उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते है। इस कथा का फल कथा सुनाने वाले व सुनने वाले दोनों को प्राप्त होता है। 


2. माली और राजा की कथा {Story of the Gardener and the King}:

  • एक बार की बात है एक राजा ने अपने खेत में जौ और चने बोये थे। तथा दूसरी तरफ माली ने अपने घर पर दुब बोई थी। माली देखता है की राजा के जौ चने हर रोज बढ़ते जा रहे है और उसकी दुब कम होती जा रही है। ये सब देखकर माली एक दिन छुपकर अपनी दुब की रखवाली करता है। तब वह देखता है कुछ कुंवारी लड़किया आती है और उसकी दुब तोड़ने लगती है। ये देख माली को गुस्सा आता है और वह उन लड़कियों के कपड़े छीनने लगता है और उनसे गुस्से में पूछता है तुम हर रोज मेरी दुब क्यों लेकर जाती हो ? जिस पर लड़किया जवाब देती है की हम गणगौर पूजन करती है इसलिए दुब लेकर जाते है और कहती है तुम हमे हमारे कपड़े वापस देदो हम गणगौर के अंतिम दिन तुम्हें मिठाई आदि देकर जायेंगे। इस पर माली मान जाता है। जब गणगौर पूरी होती है तब लड़किया माली को मिठाईया देकर जाती है। लेकिन घर पर माली नहीं होता है तो वह लड़किया उसकी माँ को मिठाइयाँ देकर आ जाती है। माली जब श्याम को घर लोटता है तो मालन उसे बताती है की लड़किया उसके लिए मिठाई देकर गयी है। मैंने वह रसोई में रख दी है तू जाकर खाले। माली जाता है परन्तु उससे रसोई का गेट नहीं खुलता है। वह जाकर मालन से कहता है की रसोई का गेट नहीं खुल रहा है। तब मालन ने गेट पर मेहंदी, रोली व काजल का छींटा देती है। जिस पर रसोई खुल जाती है। जैसे ही माली अंदर जाता है तो देखता है की ईसर जी और गणगौर बैठी है तथा रसोई में अन्न धन का भंडार भरा है। इस माली की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। और वह ख़ुशी ख़ुशी अपना जीवन व्यतीत करता है।

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3. शिव जी पार्वती की कथा{The story of Shivji Parvati}:

  • एक बार की बात है की शिवजी व पार्वती दुनिया भ्रमण के लिए आते है। चलते चलते पार्वती की नजर एक गाय पर पड़ती है जो की प्रसव पीड़ा से तड़प रही है। ये देखकर पार्वती जी कहती भगवान आप मेरे गाँठ बांध दो मेरे अंदर ये सब देखने की हिम्मत नहीं है इस शिवजी कहते है ये तो सिर्फ शुरुआत है दुनिया में इससे भी ज्यादा दुखी व्यक्ति मिलेंगे।ऐसा कहकर वह आगे बढ़ने लगते है।  फिर आगे देखते है एक हथनी बहुत परेशान हो रही है शिवजी वहां से भी पार्वती जी को ले आते है तभी पार्वती देखती है की राजा के रजवाड़े से उल्टे निशान हो रहे थे ये सब देखकर पार्वती जी फिर से पूछती है ये सब क्या हो रहा है ? तब शिवजी जवाब देते है की रानी गर्भवती है उसे प्रसव पीड़ा हो रही है। ये सब देखकर पार्वती जी हट करली की उनके पेट के गांठ लगा दे। ताकि उन्हें कभी बच्चा न हो। शिवजी फिर क्या करते जैसा पार्वती ने कहा शिवजी ने उनके पेट के गांठ लगा दी। फिर माँ पार्वती और शिवजी सैर करके वापस आ रहे होते है तो देखते है की राजा के घर शहनाई बज रही है तथा सभी लोग बहुत खुश है रानी अपने बच्चे को खिला रही होती है ये सब देख पार्वती कहती है की रानी इतनी खुश है तो मेरे बच्चा हो तो मैं कितनी खुश होऊंगी। वह फिर शिवजी से कहती है आप मेरी गांठ वापस खोल दो। इस पर शिवजी ने मना कर दिया। आगे चलने पर पार्वती जी देखती ही हथनी बच्चे के साथ खेल रही है। और गाय भी अपने बछड़े को दूध पीला रही है जिस पर पार्वती जी ने हट करली की वह उसकी गांठ खोलदे फिर भगवान शिव व पार्वती वापस कैलाश पर्वत पर आ जाते है। कुछ दिन बाद गणगौर को पर्व आता है सभी औरतें 16 श्रृंगार  करके पूजा करने आती है पार्वती जी उन सब को अमर सुहाग का वर दे दिया। इस पर शिवजी कहते है कि तुमने सारा वर तो इनको दे दिया लेकिन रानीया, बनियानी, ब्रह्मिनी तो अब आएँगी शृंगार करके तुम उन्हें क्या वरदान दोगी। तो पार्वती जी ने अपनी आंखों में काजल निकाला, मांग में सिंदूर तथा चिटली में से मेहंदी निकाल कर अखंड सौभाग्य के छींटे दिए। 


4. ईसर गोरा की कथा{Story of Isar Gaura}:

एक बार की बात है की जब ईसर जी गोरा लेने अपने ससुराल जाते है ईसर जी अपनी परीक्षा लेने के लिए जितना खाना उन्होंने बनाया था सब खा गए। जब गोरा को भूख लगी तो उसकी माँ ने कहा बेटा खाना तो नहीं बचा ये 2 बथुए की पिंडी खाकर पानी पी ले। फिर गोरा और ईसर जी विदा होकर जाने लगते है तो ईसर जी रास्ते में गोरा से कहते है की तुमने क्या खाया तो गोरा बोली जो तुमने खाया वो ही मैंने खाया। फिर ईसर जी गोरा के पेट में देखते है और कहते है। कि तुम झूठ कह रही हो तुम्हारे में पेट तो बटुए की पिंडी और सिर्फ जल है। जिस पर गोरा को बहुत गुस्सा आता है और वह कहती है की आपने आज तो किसी औरत की पेट की ढकनी खोलली है लेकिन दुबारा ऐसी गलती कभी मत करना। आपने मेरी माँ की परीक्षा ली है। ऐसा कहकर वह कैलाश पर्वत पहुंचते है।



आज की इस पोस्ट में हमने गणगौर पर्व से जुडी 4 मज़ेदार कहानियां पढ़ी है। आपको ये पोस्ट लगी कमेंट करके जरूर बताये और ऐसी ही मज़ेदार पोस्ट पढ़ते रहने के लिए हमारी वेबसाइट को फॉलो करें। 

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