Tuesday, June 25, 2024
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संत गाडगे बाबा का सम्पूर्ण जीवन परिचय | Complete life introduction of Sant Gadge Baba

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 आज हम ऐसे एक महापुरुष का जीवन परिचय आपके लिए लेकर आये है जिसने अपनी पूरी उम्र पुराने वस्त्र व भिक्षुक जीवन में निकाल दी, जी हाँ हम बाबा संत गाडगे की बात कर रहे है, जिन्होंने अपने पुरे जीवन में अनगिनत धर्मशाला, स्कूल, अस्पताल जैसी चीज़े बनवाई लेकिन कभी खुद के लिए एक कुटिया तक नहीं बनवाई। आज हम इनके जीवन परिचय के बारे में विस्तार से चर्चा  करेंगे। 

1. संत गाडगे बाबा की बुनियादी जानकारी :

नाम (Name)देवीदास डेबूजी जानोरकर 
उपनाम (Nickname)संत गाडगे महाराज, गाडगे बाबा 
जन्म (DOB) 23 फरवरी 1876 
जन्म स्थान (Birthplace)   शेंडगाव महाराष्ट्र 
गृह  नगर (Hometown)शेंडगाव महाराष्ट्र
पेशा (Profession)आध्यात्मिक गुरु 
पिता का नाम (Father)   झिंगरजी जानोरकर 
माता का नाम (Mother)       सखुबाई 
मृत्यु (Death)20 दिसंबर 1956 
मृत्यु स्थान (Death Place)अमरावती 

2. संत गाडगे बाबा का शुरुआती जीवन  व परिवार : 

  • संत गाडगे बाबा का जन्म 23 फरवरी 1876 को महाराष्ट्र के अमरावती जिले के शेडगावं नामक गांव में हुआ था। इनका असल नाम देवीदास डेबूजी जानोरकर था, ये एक धोबी परिवार से ताल्लुक रखते थे। 
  • इनके जन्म के कुछ समय पश्यात इनके पिता की मृत्यु हो गई जिस कारण इनकी माता जी इन्हें लेकर इनके नाना के घर चली गयी, यानि कि हम कह सकते है इनका पालन पोषण इनके नाना के परिवार में हुआ था। 


3. संत गाडगे बाबा का विवाह : 

  • संत गाडगे बाबा का विवाह सन 1892 यानी कि 16 वर्ष की उम्र में संत गाडगे बाबा का विवाह का दिया था। 
  • शादी के बाद इनके 3 बच्चे हुए जिनमें से अपनी सबसे छोटी बेटी के नामकरण समारोह समय शराब परोसने की जगह मिठाई व शाकाहारी भोजन परोसा। 
  • बाबा को बचपन से खेती और मवेशियों को पालने में दिलचस्पी थी। 
  • यधपि बाबा अनपढ़ थे लेकिन वह बहुत बुद्धिमान थे।  

4. संत गाडगे के बाबा का ग्रह त्याग : 

  • संत गाडगे बाबा अपने गृहस्थ जीवन से जल्द ही ऊब गए वह समाज कल्याण का कार्य करना चाहते थे और दुनिया में फैल रहे अंधविश्वासो का अंत करना चाहते थे। जिसके लिए उन्होंने 1 फरवरी 1905 को रात्रि के समय बिना किसी को बताए अपने घर से निकल पड़े। उसके बाद उन्होंने कभी वापस मुड़कर नहीं देखा और अपने धर्म कार्य में लग गए। 

5. गाडगे बाबा का संत जीवन : 

  • बाबा अपने घर को त्यागने के बाद एक गांव से दूसरे गांव की और भ्रमण करते थे। वह अपने सर पर एक टोपी व हाथ में एक झाड़ू लिए फिरते थे।  फिर रास्ते में जहाँ कही भी गंदी नालिया या फिर कचरा पड़ा दिखाई देता तो वह उसे साफ करने लगते। जिसके बदले में अगर कोई गांव वासी उन्हें पैसे देता तो वह उन पैसों को धर्म के कार्यों में लगा देते। 
  • बाबा गाडगे महाराज भूख लगने पर किसी के भी घर से रोटी मांग कर खा लिया करते थे। और जब उन्हें नींद आती तो वह किसी चबूतरे या किसी पेड़ की छाव में जाकर सो जाया करते और सुबह होते ही वापस अपने कार्य में लग जाते। 

6. बाबा गाडगे खुद जमीन पर सोकर भी औरों की करते थे मदद :

  • संत गाडगे महाराज कभी भी पैसा दान पर मिलने पर उनसे धर्मशाला, अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान इत्यादि धर्म के काम किया करते थे। आपको जानकर आश्चर्य होगा की बाबा ने पैसे मिलने पर एक रुपया भी कभी खुद की सुख सुविधाओं के लिए नहीं खर्चा, वह अक्सर जमीन पर ही सोकर अपनी रात गुजारा करते थे। और खाने के लिए के भिक्षा मांगते थे। 

7. बाबा ने अपने जीवन में किये ये सभी काम :

  • बाबा ने अपना पूरा जीवन भिक्षुक के रूप में गुजार कर समाज सुधारक का कार्य  किये है। 
  • बाबा अपने साथ एक मिट्टी का बर्तन रखा करते थे जिसे वह एक वाद्ययंत्र की तरह इस्तेमाल करते थे। 
  • बाबा ने लोगों को साधारण जीवन जीने की शिक्षा दी, धार्मिक उद्देश्य से होने वाले पशु वध रोकने के लिए अभियान चलाया,  शराब बंद करवाने के लिए लोगो को जागरूक किया, गरीबो को बाबा ने साधारण जीवन व निस्वार्थ सेवा का उपदेश दिया, बाबा ने अनाथों और विकलांगों के  लिए स्कूल स्थापित किये। 


8. इन चीज़ो के थे बाबा  कट्टर विरोधी : 

  •  संत गाडगे महाराज मूर्ति पूजा के सख्त विरोधी थे उनका मानना था की मूर्ति तो मानव द्वारा निर्मित होती है भला उसमे ईश्वर का निवास कैसे संभव है। 
  • वह धार्मिक कार्यो के लिए दी जानी पशु बलि के भी विरोधी थे। 
  • संत गाडगे जी महाराज नशाखोरी, छुआछूत के विरोधी थे। 
  • बाबा किसानों व मजदूरों के शोषण के भी कट्टर विरोधी थे। 
  • संत महात्माओं के पैर छूना, तीर्थों पर जाना इन सब चीज़ो के भी बाबा बेहद विरोधी थे। 

9. बाबा गाडगे का अंतिम समय : 

  • बाबा गाडगे महाराज मूर्ति पूजा के सख्त विरोधी थे इसलिए उन्होंने कहां की में जिस जगह अपनी अंतिम साँस लू उसी जगह मेरी समाधि बना दी जाये।  तथा मेरे मरने के बाद मेरा कोई भी मंदिर या स्मारक न बनाया जाए। 
  • 20 दिसंबर 1956 को अमरावती जाते समय बाबा गाडगे महाराज ने अपना देह त्याग कर दिया।  

10. संत गाडगे के बाबा से जुड़े रोचक तथ्य : 

  1. संत गाडगे जी महाराज ने अपने पुरे जीवन में न तो कभी नए वस्त्र धारण किये न ही कभी अपने रहने के लिए कभी आशियाना बनाया, तथा पुरे जीवन भिक्षा मांग कर ही भोजन किया है। 
  2. बाबा के पास उनकी संपत्ति के नाम पर एक लकड़ी एक फ़टी पुरानी चादर व एक मिट्टी का बर्तन था जिसे वह खाना खाने के लिए व वाद्ययंत्र की तरह इस्तेमाल करते थे। 
  3. ये पारंपरिक रीति रिवाजों व मूर्ति पूजन, पशु बलि इन सभी चीज़ों के विरोधी थे। 
  4.  ये दान में मिलने वाले पैसों को हमेशा धार्मिक कार्यो में लगा देते थे। 
  5. अपने नाना के घर बाबा खेत में पशु चराने जाया करते थे। 
  6. इनका कहना था की सबसे पहला स्थान शिक्षा को देना चाहिए चाहे एक टाइम भूखे रह लो नए वस्त्र न पहनो लेकिन बच्चों को शिक्षा अवश्य दिलाओ।  


FAQ : 

Q. 1 बाबा गाडगे महाराज  का असली नाम क्या है?

Ans. देवीदास डेबूजी जानोरकर 

Q. 2  बाबा गाडगे महाराज का जन्म कहां पर हुआ? 

Ans.  महाराष्ट्र के अमरावती जिले के शेडगावं नामक गांव में  

Q. 3 बाबा गाडगे महाराज की पत्नी का क्या नाम है?

Ans. ज्ञात नहीं 

Q. 4  बाबा गाडगे महाराज के कितने बच्चे है?

Ans. 3 बच्चे है

Q. 5 बाबा गाडगे महाराज ने समाधि कब ली? 

Ans. 20 दिसंबर 1956

Q. 6  बाबा गाडगे महाराज किसके चीज़ विरोधी है ?

Ans. मूर्ति पूजन, पशु वली 

Q. 7 बाबा गाडगे महाराज के माता पिता क्या नाम है ?

Ans पिता झिंगरजी जानोरकर, माता सखुबाई 

Q. 8  बाबा गाडगे महाराज की जाति क्या थी?

Ans. बाबा गाडगे महाराज एक धोबी परिवार से ताल्लुक रखते थे 

Q. 9 बाबा गाडगे महाराज क्या खाना पीना पसंद नहीं करते थे ? 

Ans. बाबा गाडगे महाराज को शराब पीना व मांसाहारी भोजन खाना पसंद नहीं था। 


Q. 10  बाबा गाडगे महाराज ने देह त्याग कब किया ?

Ans. 20 दिसंबर 1956

दोस्तों आज की इस पोस्ट में हमने बाबा गाडगे महाराज के जीवन परिचय के बारे में चर्चा की है, तथा बाबा के द्वारा किये गए कार्यो के बारे में जाना है, आपको ये पोस्ट कैसी लगी मुझे कमेंट करके जरूर बताये अगर आप भी ऐसी ही रोचक जानकारी हर रोज पाना चाहते हो तो आप हमारी वेबसाइट Knovn.in को फॉलो कर सकते है। 

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