Monday, June 24, 2024
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रामनवमी के दिन रामचरितमानस के इन 5 शक्तिशाली श्लोकों का जाप करने से बरसेगी प्रभु श्री राम की कृपा। 

चैत्र रामनवमी 2023, नवरात्रि नवमी 2023, रामनवमी 2023, (Chaitra Ram Navami 2023, Navratri Navami 2023, Ram Navami 2023)  

रामनवमी हर वर्ष चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की नवमीं को भगवान श्री राम के जन्मोत्सव के रूप में  मनाया जाता है। इस दिन दिन प्रभु श्री राम की बाल रूप में अर्चना करते है। इसी दिन चैत्र पक्ष के नवरात्री का अंतिम दिन भी रहता है। भगवान श्री राम की आराधना में अगर इन श्लोकों का जाप किया जाये तो प्रभु श्री राम बहुत जल्द आपकी भक्ति से प्रसन्न होंगे। 

रामचरितमानस की वह 5 अद्भुत चौपाई निम्न है।(Ramcharitmanas Chaupai)

पहली चौपाई{First Chaupai} :  

“नाथ दैव कर कवन भरोसा, 

सोषिअ सिंधु करिअ मन रोसा। 

 कादर मन कहुँ एक अधारा, 

दैव दैव आलसी पुकारा।

भावार्थ – रामचरित मानस की इस चौपाई का अर्थ है  कि भगवान श्रीराम बहुत शक्तिशाली थे परन्तु फिर भी वह अपना कार्य संयम के साथ किया करते थे, जिससे कि उस कार्य में कोई भी विघ्न ना आने पाए। चौपाई में बताया गया है कि जब प्रभु श्री राम समुद्र को पार करने के लिए उससे रास्ता मांगने के लिए ध्यान कर रहे थे, उस वक़्त लक्ष्मण ने प्रभु राम को उनकी शक्ति का एहसास दिलवाया, भगवान राम को सब कुछ पता था परन्तु  फिर भी प्रभु ने शक्ति अपनाने से पहले शांति से हालातों को सुधारने का प्रयास किया निपटने का प्रयास किया। ये चौपाई सिखाती है कि व्यक्ति तन तथा धन से कितना ही बलशाली क्यों न हो, बुद्धि के बिना सफलता नहीं पाई जा सकती है। 

दूसरी चौपाई{Second Chaupai} :

“जे न मित्र दुख होहिं दुखारी, 

तिन्हहि बिलोकत पातक भारी। 

 निज दुख गिरि सम रज करि जाना, 

मित्रक दुख रज मेरु समाना।”

अर्थ – रामचरित मानस की इस चौपाई का अर्थ है यह भगवान श्रीराम तथा वानर राज सुग्रीव की सच्ची मित्रता के बारे में बताती है। जिसका अर्थ है कि बिना स्वार्थ की भावना से दोस्ती निभाने वाले की प्रभु सदैव  रक्षा करते हैं। वहीं जो लोग अपने मित्र या फिर दुखियों लोगों के दुख में भी दुखी नहीं होते है वे व्यक्ति अपने जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ सकते है। साथ ही ऐसे लोग पाप के भागी भी होते हैं। मित्र चाहे एक ही क्यों न हो लेकिन सच्चा हो तो उसी से आपका जीवन संवर जाता है, भगवान श्री राम स्वयं हमेशा उनकी रक्षा करते हैं जो मित्रता में कभी भी स्वार्थ नहीं लाते। 

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तीसरी चौपाई{Third Chaupai} :

अपि च स्वर्णमयी लंका, 

लक्ष्मण मे न रोचते। 

जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।

अर्थ – रामचरित मानस की इस चौपाई में प्रभु श्री राम अपने छोटे भाई लक्ष्मण से कहते हैं कि भले ही लंका सोने से क्यों न गढ़ी हो परन्तु यहां शांति नहीं है। मेरे लिए तो मां व हमारी जन्मभूमि स्वर्ग से भी ज्यादा कीमती है।  इससे ये सीखने को मिलता है। कि जो मनुष्य अपनी माँ तथा जन्मभूमि से जुड़ा हुआ रहता है और सभी जीवों की भलाई का काम करता है, वह हमेशा आगे ही रहता है। तथा  ऐसे व्यक्ती हमेशा  सर्वश्रेष्ठ कहलाते हैं। 

चौथी चौपाई{Fourth Chaupai} :

बोले बिहसि महेस तब ग्यानी मूढ़ न कोइ।

 जेहि जस रघुपति करहिं जब सो तस तेहि छन होइ।

अर्थ – रामचरित मानस की इस चौपाई का अर्थ है कि भगवान की मर्जी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता है।  मनुष्य को कभी भी इस भ्रम में नहीं जीना चाहिए की वह हमेशा धनवान रहेगा या कंगाल रहेगा। प्रभु  श्री राम की अर्चना करने वाले व्यक्तियों का भाग्य बदलने में समय नहीं लगता है  ऐसे में कभी भी अहंकार को धारण नहीं करना चाहिए, अहंकार की ज्वाला व्यक्ति का सब सुख-चैन जला देती है। जो प्राप्त है, वो पर्याप्त है। उसके लिए सदैव ईश्वर का धन्यवाद करें, प्रभु की भक्ति ही सफलता का मार्ग होती है। 

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पांचवी चौपाई{Fifth Chaupai} :

मोह सकल ब्याधिन्ह कर मूला,

 तिन्ह ते पुनि उपजहिं बहु सूला॥ 

काम बात कफ लोभ अपारा।

क्रोध पित्त नित छाती जारा॥

अर्थ – रामचरित मानस की इस चौपाई का अर्थ है कि सभी तकलीफ और परेशानियों की जड़ मोह होता है किसी भी वस्तु या मनुष्य से आवश्कयता से अधिक लगाव हमें हमारे लक्ष्य से भटका देता है तथा धीरे धीरे असफलता की ओर लेजाने लगता है। काम, लोभ, क्रोध का त्याग करने में ही हम सब की भलाई है। इनके रहते आप कभी कामयाबी की राह पूरी नहीं क़र सकते है। 

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