Tuesday, June 25, 2024
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Navratri Sthapana 2023: चैत्र मास नवरात्रि आरंभ, शुभ मुहूर्त, पूजन सामग्री, पूजन विधि, आरती || Chaitra Maas Navratri Aarambh, Shubh Muhurat, Worship Material, Pujan Vidhi, Aarti.

इस वर्ष चैत्र मास 22 मार्च 2023 बुधवार को शुरू होने जा रहा है। इस दिन सभी हिन्दू मिलकर हिन्दू वर्ष की शुरुआत व नवरात्री स्थापना करते है। इस वर्ष विक्रम संवत 2080 आगाज होने जा रहा है। 

नवरात्री स्थापना का शुभ मुहूर्त {Navratri Sthapana 2023 Shubh Muhurat} : 

  • नवरात्री स्थापना का शुभ मुहूर्त 22 मार्च 2023 को सुबह 06:32 (6 बजकर 32 मिनट) से प्रारंभ होकर सुबह के 07:32 (7 बजकर 32 मिनट) तक रहेगा। 

नवरात्रि पूजन सामग्री{Navratri Worship Material}: 

  • कलश, मोली, आम या अशोक के पेड़ के पत्ते, रोली, गंगा जल, सिक्का, गेहूं या जौ, मिट्टी कर बर्तन जौ बोन के लिए, हवन सामग्री(हवन कुंड, आम की लकडिया,घी, लोबान, गुग्गल, सुपारी, कपुर), चौकी, लाल कपड़ा, काले तिल, कुमकुम, अखंड अक्षत, धुप, फूल, प्रसाद(पंचमेवा ), माँ के श्रंगार का सामान (लाल चुनरी, सिंदूर, बिंदी, काजल, चुड़िया, मेहँदी इत्यादि)

नवरात्री पूजन विधि {Navratri Worship Method}: 

  • नवरात्रि पूजन के लिए सर्वप्रथम प्रातः जल्दी उठकर स्नान आदि करे। 
  • फिर पूजा के स्थान को अच्छे से साफ करके वहाँ गंगा जल छिड़के। 
  • फिर मंदिर में दिया जलाये। 
  • उसके बाद माता की प्रतिमा पर गंगा जल के छींटे दे। 
  • इसके बाद चौकी के ऊपर लाल कपड़ा बिछा कर माता रानी व गणेश जी की स्थापना करें। 
  • फिर मीठी के बर्तन में जौ बोये। फिर उस बर्तन के ऊपर कलश की स्थापना करें। 
  • कलश पर स्वास्तिक बनाकर मोली बांधे, तथा कलश में सुपारी, सिक्का डाले। 
  • बाद में आम के पत्तों का गुच्छा कलश पर लगाकर उस पर नारियल रखे। 
  • उसके बाद प्रतिमा और कलश पर लाल फूल, अक्षत, सिंदूर अर्पित करें। व फल और मिठाई चढ़ाये। 
  • फिर माँ के आगे दीपक जलाकर गाय के उपलों से जोत ले। 
  • इसके बाद माँ भोग अर्पित करें और दुर्गा चालीसा व माता रानी की आरती गाएं। 

हिन्दू नववर्ष 2023 {Hindu New Year 2023}:

माँ दुर्गा की आरती {Maa Durga Aarti}:  

जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी, तुमको निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी। जय….🙏🏻 

मांग सिंदूर बिराजत टीको मृगमद को, उज्ज्वल से दोउ नैना चंद्रबदन नीको। जय….🙏🏻 

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै, रक्तपुष्प गल माला कंठन पर साजै। जय….🙏🏻 

केहरि वाहन राजत खड्ग खप्परधारी, सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुःखहारी। जय….🙏🏻 

कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती, कोटिक चंद्र दिवाकर राजत समज्योति। जय….🙏🏻 

शुम्भ निशुम्भ बिडारे महिषासुर घाती, धूम्र विलोचन नैना निशिदिन मदमाती। जय….🙏🏻 

चौंसठ योगिनि मंगल गावैं नृत्य करत भैरू, बाजत ताल मृदंगा अरू बाजत डमरू। जय….🙏🏻 

भुजा चार अति शोभित खड्ग खप्परधारी, मनवांछित फल पावत सेवत नर नारी। जय….🙏🏻 

कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती, श्रीमालकेतु में राजत कोटि रतन ज्योति। जय….🙏🏻 

श्री अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै, कहत शिवानंद स्वामी सुख-सम्पत्ति पावै जय….🙏🏻

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