Monday, June 24, 2024
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33 करोड़ या फिर 33 कोटि? आखिर कितनी है हिंदू धर्म में देवताओं की संख्या ? || 33 crore or 33 crore? After all, what is the number of gods in Hinduism?

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हमारे हिंदू धर्म में दो प्रकार से देवताओं की संख्या बताई गयी है। पहला 33 करोड़ देवी देवता तथा दूसरा 33 कोटि के देवता। अब इनमें से कौनसी संख्या सही है उस समस्या को लेकर ये चर्चा का विषय बना हुआ है आज की इस पोस्ट में हम जानेंगे आखिर हिन्दू धर्म वास्तविस्क देवी देवताओ की संख्या क्या है पोस्ट के लास्ट तक जरूर बने रहिएगा क्युकी आज यहा  आपको आपके सवालों के जवाब के साथ ही मज़ेदार रोचक तथ्य भी जानने को मिलेंगे। 

  • त्रिदेव भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश हिंदू धर्म में सृष्टि के रचयिता माने जाते हैं। किसी भी शुभ कार्य में हम सबसे पहले गणेश जी की पूजा करते है। हर एक दिन हिन्दू धर्म में किसी न किसी देव को समर्पित होता है। जिस वजह से  प्रत्येक देवी-देवताओं का अपने स्थान पर एक विशेष स्थान रखते है। हमारे हिंदू धर्म में दो प्रकार की देवताओं की संख्या बताई गई  है। 33 करोड़ देवी देवता व 33 कोटि के देवता। जिसमें से कुछ लोगों का मानना है कि 33 करोड़ और 33 कोटि एक ही बात है। परंतु शास्त्रों में 33 कोटि देवताओं का ही उल्लेख किया गया है। आज की इस पोस्ट में हम आपको बताएंगे कि शास्त्रों में देवताओं की 33 कोटि संख्या का मतलब क्या होता है। 
  • कुछ विद्वानों कहना है कि हिन्दू देवी देवताओं को शास्त्रों में 33 कोटि के प्रकार में रखा गया है तथा कुछ विद्वानों कहना है यह बात सही नहीं है। वेदों में 33 कोटि देवताओं की चर्चा की गयी है। हिन्दू धर्म के गुरुओं तथा अनेक बौद्धिक वर्ग ने इस कोटि शब्द के दो प्रकार अर्थ निकाले हैं। जिसका एक अर्थ करोड़ है तथा दूसरा अर्थ प्रकार यानि श्रेणी रखा गया है। तार्किक दृष्टि से इसे देखे तो कोटि शब्द का दूसरा अर्थ इस विषय में अधिक सत्य लगता होता है जिसका अर्थ तैंतीस प्रकार की श्रेणी या प्रकार के देवी-देवता है। लेकिन जितने मुँह उतनी ही बातें इसलिए हर कोई अपना इस विषय में अलग अलग मत रखता है। आइये नीचे उस प्रकार को जानते है। 

वैदिक विद्वानों अनुसार:-

वेदों में जिन देवताओं का उल्लेख किया जाता है उनमें से अधिकतम नाम प्राकृतिक शक्तियों के नाम है, जिन्हें देव नाम से संबोधित किया जाता है। असल में वह देव नहीं है। बल्कि उन्हें देव कहने से उनका महत्व प्रकट होता है। 

प्राकृतिक शक्तियों को मुख्यतः:  मरुतगण समूह, आदित्य समूह, रुद्र समूह, वसु समूह, प्रजापति समूह इत्यादि समूहों में बांटा गया हैं।

वैदिक विद्वानों का कहना है कि 33 प्रकार के अव्यय या पदार्थ पाए जाते हैं जिन्हें देवों की संज्ञा दी जाती है। वे 33 प्रकार इस अनुसार हैं। 

33 में से 8 वसु है। 

  • वसु का अर्थ हमें वसाने वाले आत्मा का जहां पर वास होता है। ये आठ वसु हैं जो क्रमश धरती, अग्नि, वायु, जल, आकाश, चंद्रमा, सूर्य तथा नक्षत्र है। 

33 में से 11 रुद्र हैं। 

  • रुद्र हमारे शरीर के अव्यय है। जब यह अव्यय एक-एक करके शरीर से निकलने लगते  हैं इसका मतलब जब यह रोदन कराने वाले होते हैं। मतलब की जैसे किसी की मृत्यु हो जाती है तो उसके शरीर के 11 रुद्र निकल जाते हैं जिनके निकलने के बाद उस  व्यक्ति को मृत मान लिया जाता है। 
  • शरीर से निकलने वाले इन रुद्रों के नाम क्रमशः प्राण, अपान, समान, उदान, व्यान, कुर्म, किरकल, नाग, देवदत्त तथा धनंजय है। 8 वसु तथा 11 रुद्र मिलकर हो गए 19. 

33 में से 12 आदित्य होते हैं। 

  • आदित्य सूर्य को कहा जाता हैं। हमारा भारतीय कैलेंडर सूर्य पर ही आधारित माना जाता है। साल के 12 महीनों को 12 आदित्य कहा जाता हैं। इन्हें आदित्य इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह समय के साथ साथ हमारी आयु को हरते हैं। ये 12 आदिय साल के 12 महीनों के नाम हैं। 8 वसु, 11 रुद्र तथा 12 आदित्य मिलकर कुल हुए 31 अव्यय।

32वां अव्यव है इंद्र। 

  • इंद्र का अर्थ बिजली या ऊर्जा माना गया है।

33वां है यज्ज।

  •  यज्ज का मतलब प्रजापति, जिससे वायु, दृष्टि, जल तथा शिल्प शास्त्र या औषधियां पैदा होती है। 
  • ये 33 कोटी अर्थात 33 प्रकार के अव्यव इस प्रकार समाप्त होते हैं जिन्हें देव कहा जाता है। 
  • देव का अर्थ है दिव्य गुणों से युक्त।  

पौराणिक मत :

  • प्रमुख 33 देवता निम्न प्रकार है। 

12 आदित्य:– 

1.अंशुमान

2.अर्यमन

3.इन्द्र

4.त्वष्टा

5.धातु

6.पर्जन्य

7.पूषा

8.भग

9.मित्र

10.वरुण

11.विवस्वान

12.विष्णु

8 वसु:- 

1.आप

2.ध्रुव

3.सोम

4.धर

5.अनिल

6.अनल

7.प्रत्यूष

8. प्रभाष

11 रुद्र:- 

1.शम्भु

2.पिनाकी

3.गिरीश

4.स्थाणु

5.भर्ग

6.भव

7.सदाशिव

8.शिव

9.हर

10.शर्व

11.कपाली

2 अश्विनी कुमार:- 

1.नासत्य

2.द्स्त्र

कुल : 12+8+11+2=33

निष्कर्ष : वेदों के कोटि शब्द को अधिकतर लोगों ने करोड़ समझा तथा यह मान लिया है कि हमारे हिन्दू धर्म में 33 करोड़ देवता होते हैं। लेकिन यह हक़ीक़त नहीं है। सच यह भी नहीं है कि देवता 33 प्रकार के होते हैं। क्योंकि पदार्थ अलग होते हैं व देवी या देवता अलग होते हैं। यह कहना सही है होगा कि  देवी-देवता 33 करोड़ नहीं होते हैं परन्तु  33 भी नहीं होते है। हमारे धर्म में देवी और देवताओं की संख्या करोड़ों में तो नहीं परन्तु हजारों में जरूर हो सकती है तथा सभी का कार्य नियुक्त होता है।

दोस्तों आज की इस पोस्ट में हमने 33 करोड़ या फिर 33 कोटि विषय में चर्चा की है आपको हमारी ये पोस्ट कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताये और फ्यूचर में नई खबरों से अपडेट रहने के लिए आप हमारी वेबसाइट को फॉलो कर सकते है।

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